कुछ नसीब ऐसे भी है जिन्हें सुकून नहीं मिलता,
तपते रेगिस्तानों में प्यासे को दरिया नहीं मिलता ,
झुलजती धुप में राही को द्रक्हतो के साये नहीं मिलता ,
कुछ नसीब ऐसे भी है जिन्हें शुकुन नहीं मिलता
तूफानों में घिरे मुसाफिर को किनारा नहीं मिलता ,
भंवर में फसे लोगो को जीवन नहीं मिलता,
कुछ नसीब ऐसे है जिन्हें शुकुन नहीं मिलता ,
अगरचे खवाहिशकरे दोस्ती कि दोस्त नहीं मिलाता,
मकान मील जाता है घर नहीं मिलता ,
रिश्तो कि भीड़ बहुत मिलती है अपना कहा सके वो रिश्ता नहीं मिलता ,
कुछ बदनसीब ऐसे भी है जिन्हें दिल से शुकुन नहीं मिलता
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3 comments:
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"काम है कुछ आपसे" नाम ब्लोग से आपकी तजा रचना "शुकुन नहीं मिलता" पढ़ने को मिली, सचमुच जिंदगी के सफ़ेद हिस्से को आपने जिस तरह बयां किया है, जीवन का रिदम बनता है. बहुत ही उम्दा रचना...हाँ, सिर्फ कहीं किसी लाइन में थोड़े से सुधार की जरुरत भी है.
लिखते रहिये....शुभकामनाओं सहित;
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उल्तातीर: ultateer.blogspot.com
सुंदर लाइनें
accha likhti hai aap, magar april 08 ke baad se kya aap ne kuch bhi nahin likha, thoda sa spelling per dhyaan deejiye.
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