Sunday, March 16, 2008

कह दे सभी जज्बात
फिर मुलाकात हो न हो
शायद इस जन्म में
फिर बात हो न हो
वादा न मिलाने का
निभाऊ गी हो न हो
शायद इस जन्म में
बात हो न हो
तेरे मिलाने को
न आऊ हो न हो
कह दे सभी जज्बात
फिर बात हो न हो
शायद इस जन्म में
मुलाकात हो न हो

7 comments:

Unknown said...

सुरभि जी,
आपकी कविता में जीवन का जीवन्त स्वरूप नजर आता है , मानव मन की सारी व्यथआ को सहज प्रसतुत किया है ।
पढ़कर मन प्रफुल्लित हो उठा .बहुत ही अच्छी , सुन्दर कविता .
बधाई स्वीकार करें।।

Unknown said...

diye gaye kuch sabad wali kavita aaj dubara padhi ...aaj to ye kavita aur bhi achi lagi ............shubhkamna

Anonymous said...

shukriyaa surbhi ji aap ko bhi pdne kaa maukaa mila ...khushi hui....shubhkaamnaye

Anonymous said...

shukriyaa surbhi ji aap ko bhi pdne kaa maukaa mila ...khushi hui....shubhkaamnaye

Dr SK Mittal said...

कह दे सभी जज्बात फीर मुलाकात हो न हो
शायद इस जन्म में फीर बात हो न हो
वादा न मीलने का नीभाउन्गी हो न हो
शायद इस जन्म में बात हो न हो
तेरे मीलने को न आऊ हो न हो
कह दे सभी जज्बात फीर बात हो न हो
शायद इस जन्म में मुलाकात हो न हो

लेकीन आपकी कलम ने तो आज ही कम से कम कलम से तो मुलाकात करा दी है
आप के जज्बातों का भी कुछ जायजा मील ही गया और आप की अनजानों की सर्हाना करने की कला भी देखी.
धन्यवाद

डॉ .अनुराग said...

gahri udasi chipi hai is kavita me......

Amit K Sagar said...

pratham rachnaa ke baad is rachnaa ko padhnaa aur bhi jadaaa dilchasp rahaa. sachmcuh bahut hi deppthly feelings...super.

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