kam ek khash hai aapse.....
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लकीर के फकीर बहुत मिलिगे ..खुद से फकीरी की हो जहा ...
सूरज की तरह तू भी दमके ..तुझ ही से हो जग रोशन ..चा...
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surabhi
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Tuesday, January 22, 2008
लकीर के फकीर बहुत मिलिगे ..
खुद से फकीरी की हो जहा में कम मिलेगे..
कद में ओरो से भले ही कम मिलेगे..
भरी भीड़ में भी हम ओरो से अलग दिखेगे
1 comment:
Unknown
said...
सुरभि जी आप अच्छा लिख रही है। उम्मीद है कि इसे आगे भी इसे जारी रखेगी । शुभकामनाएं।।
March 10, 2008 at 9:21 PM
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1 comment:
सुरभि जी आप अच्छा लिख रही है। उम्मीद है कि इसे आगे भी इसे जारी रखेगी । शुभकामनाएं।।
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