Monday, February 25, 2008

करुनानिधान की कृपा से
वृक्षों पे नव किसलय निकले
कहकहे कुसुमो ने इस कोशल से लगाये
कर्तव्य पथ से डेट रहे
बसंत की कसौटी पे खरे रहे
जगनिर्माता कलाकार भी
देख उन्हें कवि बन
कविता में कार्न्ति बीज
मानव मन में बोगाया
उसकी कविता बिखरे
ये सोच मोन कमाओ
का काक लगा
आपना काम पूरा कर चला