करुनानिधान की कृपा से
वृक्षों पे नव किसलय निकले
कहकहे कुसुमो ने इस कोशल से लगाये
कर्तव्य पथ से डेट रहे
बसंत की कसौटी पे खरे रहे
जगनिर्माता कलाकार भी
देख उन्हें कवि बन
कविता में कार्न्ति बीज
मानव मन में बोगाया
उसकी कविता बिखरे न
ये सोच मोन कमाओ
का काक लगा
आपना काम पूरा कर चला
Monday, February 25, 2008
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